ऐ मधुर मनोहर ख्वाब

ऐ मधुर मनोहर ख्वाब हमारे, क्यों नहीं हमे प्रकाशवान  करते हो, मंदबुद्धि लिए विचरता है मन हमारा , उसे ज्योति क्यों नहीं दिखलाते हो, मधुर मधुर सी मनमोहक कर्मो की छाप क्यों नहीं छोड़ जाते  हो, मनुस्य भटक रहा इस बवंडर में , कर्म की परिभाषा क्यों नहीं बतलाते हो, कोमल कोमल हृदय तुम्हारा फिर […]